Tuesday, August 19, 2014

तेरी मुस्कुराहटें ज़िन्दगी की आहटें

तेरी मुस्कुराहटें
ज़िन्दगी की आहटें

मुझ तक
जब भी आती हैं
रौशनी लाती हैं

कभी फूल
कभी सबा बनकर
वज़ूद मेरा महकाती हैं 
बरसती हैं
कभी
घटा बन कर
और मेरी रूह भीगती हैं

कभी खिलती हैं
वसंत बनकर
कभी शरत चंद बन जाती है
सावन भादो बरसे जितना
धूप सुहानी लाती है

कभी पंख
कभी परवाज़ बनकर
आकाश तक ले जाती हैं
थके हुए कदमों में
आकर
कभी
जान फूंक कर जाती हैं

कभी शबनम
कभी मोती बनकर
कभी जुगनू
जगमगाती हैं
मुझ तक
जब भी आती हैं
रौशनी लाती हैं

ज़िन्दगी की आहटें
तेरी मुस्कुराहटें

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