Monday, August 22, 2011

तू ही तो हिम्मत का साथी है....


जी उठे
हैं हौंसले
अब बन कर के तूफ़ान
मुट्ठियों
को बांधले
बस तू लड़ा दे जान
लिख दे फलक पे अपनी नयी पहचान
आकाश है तेरा जो तो मन में ले ये ठान
बादलों को चीर कर भरनी है उड़ान
चल तुझे...
मंजिल बुलाती है
तू ही तो 
हिम्मत का साथी है....

आँखों में भर ले तो सूरज
पैरों को दे धार
साँसों को चढ़ने दे थोडा
खुद को तो ललकार
रोक न पायेगी तुझको,
अब कोई दीवार
पर्वतों को लांघने को है जो तू तैयार
चल तुझे...
मंजिल बुलाती है
तू ही तो ही तो
हिम्मत का साथी है....
खुद को जो तू जीत ले
दुनिया तम्हारी है
है आज का दिन तेरा
पूरी तैयारी है
चल तुझे...
मंजिल बुलाती है
तू ही तो 
हिम्मत का साथी है....

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